कबीर के दोहे

kabir das – Biography

साईं इतना दीजिये जिसमे कुटुम्ब समाए , मैं भी भूखा न रहूँ , साधु भी न भूखा जाए

कबीरा खड़ा बाजार में मांगे सब की खैर
न कहु से दोस्ती न कहु से बैर

बुरा जो देखन में चला , बुरा न मिलया कोई ,
जो मन खोजा अपना तो मुझ से बुरा न कोई

चलती चक्की देख के दिया कबीरा रोए
दुई पाटन के बीच में साबुत बचा न कोई

ऐसी वाणी बोलिये , मन का आपा खोये ,
अपना तन शीतल करे , औरों को सुख होये .

जग में बैरी कोई नहीं ,जो मन शीतल होय
या आपा को दारि दे ,दया करे सब कोई

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